Sunday, April 07, 2013

आदत जो होचुकी है !

जो हमेशा तुम्हरिही ख़ुशी के बारे में सोचतेथे ..
तुम्हारी बेवफाई ने अच्छा सिला दिया ..
सोचना तो दूर्कि बात है ..
आज कल हम तुम्हे याद भी नहीं करते है ...
क्यूँ की  तुम्हारे बिना रहने की आदत जो होचुकी है।

हर पल तुम्हे फ़ूल की तरहा  चाहा था
जो तू काटा बनकर चुबी  ...
वो भवर का प्यार तुम्हे समज न आय ..
डूबी हुयी थी जो किसी ऐय्याशी में ...
किसीको चाहनेकि उम्मीद न रहा ..क्यूँ की  आदत जो होचुकी है।

साथ साथ चलनेका जो वादा किया था ..
छोटेसे घोस्लेकी सपने जो देखे थे ...
तुम्हे थो कदर ही  नहीं था उसके जस्बात का ..
पल भर में जो भिकार गए ..
किसी और का रस्ता क्यूँ देखे कोई ..आदत जो होचुकी है।

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