वोह कोई और ही है



मेरे हर सुभह को ख़ूबसूरत बनानेवाली

नए आशावों से पल पल को भरनेवाली , वोह कोई और ही है !

जिसके बातें मुझे अपना पन का एहसास दिलाती है

जिसिकी हर सास से प्यार उभर उभर आती है , वोह कोई और ही है !

उसकी एक मुस्कान से हर फूल खिलते है

उसकी अनंत देखभाल से जो बाग़ में ख़ुशी खिल जाती है , वोह कोई और ही है !

मेरे जीवन में रंग भरनेवाली जो, तू तो कभी थिही नहीं

मेरे आंगन को हरा भरा करनेवाली , वोह कोई और ही है !





No comments:

ವರ್ಷಧಾರೆ

ಸರ-ಸರನೆ ಹರಿದು ಬರುತ್ತಿರುವ ವರ್ಷಧಾರೆಗೆ ಬೇಲಿಯ ಕಟ್ಟಲಾದೀತೆ....? ನೀರು ತುಂಬಿ ಹರಿಯುವ ನದಿಯನು ಹರಿಯುವುದನ್ನು ನಿಲ್ಲಿಸಲಾದೀತೆ....? ಒಲಿದು ಬಂದ...