क्यूँ ना माना तू बात मन की…?

क्यूँ ना माना तू बात मन की…?

क्यूँ ना माना तू बात मन की
मन की बात ना माना तूने, एक बेवफ़ा से की दोस्ती
जुटे एहसास दिखाया जिसने
मोहबत की छाया में उसकी मस्ती
ना थी कदर उसको तुम्हारे दोस्ती की,
ना थी कदर तुम्हारे जसबात की..
बस बेवफ़ाई देखाई उसने
क्यूँ ना माना तू बात मानकी ? -भावप्रीय

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